Wednesday, July 27, 2011

एक भिखारी की आत्म कहानी
जाडे का प्रात:काल था। शरीर को कम्पित करनेवाला शीत पड रहा था। घर के सारे व्यक्ति बैठे हुए चाय पी रहे थे। आनन्द का वातावरण अपनी चरम सीमा पर था - तभी द्वार पर से किसी ने पुकारा, " भगवान तुम्हारा भला करे, दो रोटी का आटा दिला दो।" इस एक पुकार की तो हम में से किसी ने लेशमात्र भी चिन्ता न की, परंतु जब थोडी देर के बाद पुन: वही करुण एवं दीनता से भरे हुए शब्द सुनाई पडे तो मैं उठा। उस समय मेरे मन में उस भिक्षुक के प्रति दया नहीं थी बल्कि मैं सोच रहा था कि ये भिक्षुक कार्य क्यों नहीं करते? ये समाज पर भार बनकर क्यों रहते हैं? इस प्रकार के विचारों में निमग्न मैं दरवाज़े पर गया। वहाँ एक दीन वृद्ध भिखारी को देखा, जो ठंड के कारण थर-थर काँप रहा था। भूख के कारण रो रहा था। जाडे से बचने के लिए उसके पास पर्याप्त वस्त्र भी नहीं थे। मैं ने कहा, "आओ अंदर, मैं तुम्हें भोजन दे दूँगा।" और वह भिखारी घर के भीतर चला आया। मैं ने उसे खाने के लिए रोटियाँ दीं और वह खाने लगा। भोजन करके जब वह निवृत्त हुआ तो मैं ने पूछा, "तुम इस वेदना एवं दुख से भरी हुई अवस्था को किस प्रकार प्राप्त हुए?”
मेरे इस प्रश्न को सुनकर क्षण भर उसने मेरी ओर देखा और बोला – “बाबूजी, इन बातों में क्या लोगे? यदि जानना ही चाहते हो तो सुनो। जहाँ तक मुझे याद है, जब मैं छोटा था तब मेरे घर में किसी प्रकार का अभाव नहीं था। किन्तु समय बदलता रहता है, क्योंकि कभी दिवस है और कभी अँधेरी रात। किसी मनुष्य को सर्वदा सुख नहीं मिला करता और यही मेरे साथ भी हुआ था।
मैं एक किसान परिवार का सदस्य हूँ। मेरे पूर्वज खेती करते थे। मैं भी पहले खेती करता था। जब आय कम और खर्च ज़्यादा पडने लगे तो गाँव के ज़मींदार से कर्ज़ लेकर खेती करने लगा। कर्ज़ कैसे चुकाता? पहले तो बैल बेचा। अंत में खेत को गिरवी रखकर कर्ज़ चुकाया। फिर क्या करूँ? अब तो खेत भी नहीं रहा और मैं किसान भी नहीं रहा।
पहले मज़्दूरी करता था। खेती के अलावा कुछ जानता भी नहीं था। कहीं नौकरी करके जीवन बिता लूँ तो कहाँ मिलती है इस बुढे को नौकरी ?
बाबूजी, समाज हमें फटकारता है। पर क्या वह कभी सोचता है कि इतने भूखों की जीविका का प्रबंध कैसे किया जाय ? भिक्षा तो हम लोगों को विवश होकर माँगनी पडती है। कौन ऐसा होगा, जो कि मेहनत व मज़दूरी करने के बजाय दर-दर फटकार सुनने के लिए जाएगा ? भिखारी तो जीवित ही मृतक के समान होता है। मैं भी अब निराश्रित होकर भीख माँगता फिरता हूँ, यदि भीख न माँगूँ तो इस वृद्ध अवस्था में क्या करूँ ? आँखों से दिखाई नहीं देता, दो डग चलने पर कदम लडखडाने लगते हैं।
भिखारी के जीवन की इस कष्टमय कहानी सुनकर मेरी आँखों से आँसू निकल पडे। मैं ने सोचा, मनुष्य का भाग्य कितना क्रूर होता है ! मनुष्य को वह कितना बदल डालता है।
अवलम्ब : आदर्श हिंदी निबंध

Tuesday, July 5, 2011

भाषा का अडिस्थान

स्वर

  • अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ॡ ऍ ऑ
(हिंदी में ॠ ऌ ॡ का प्रयोग प्रायः नहीं होता।) (हिंदी में ऍ ऑ का प्रयोग विदेशी ध्वनियों को दर्शाने के लिए होता है।)

[संपादित करें] व्यंजन

  • क ख ग घ ङ
  • च छ ज झ ञ
  • ट ठ ड ढ ण
  • त थ द ध न
  • प फ ब भ म
  • य र ल व
  • श ष स ह
  • क्ष त्र ज्ञ
  • क़ ख़ ग़ ज़ ड़ ढ़ फ़
  • (नुक़्तायुक्त ध्वनियाँ क़,ख़,ग़,ज़ और फ़ विदेशी शब्दों में प्रयुक्त होती हैं जैसे ज़ेब्रा, फ़ोन आदि।)
  • (नुक़्तायुक्त ध्वनियाँ ड़ और ढ़ हिंदी के अपने व्यञ्जन हैं, यह ना संस्कृत में थे और ना किसी विदेशी भाषा से लिए गए हैं।)

[संपादित करें] शब्द विभाग

अक्षरों के समूह को, जिसका कि कोई अर्थ निकलता है, शब्द कहते हैं। उदाहरण के लिए क, म तथा ल के मेल से 'कमल' बनता है तथा इसका अर्थ भी निकलता है अतः 'कमल' एक शब्द है किन्तु 'लकम' भी इन्हीं तीनों अक्षरों के मेल से बनता है परन्तु उसका कुछ भी अर्थ नहीं निकलने के कारण वह शब्द नहीं है।
व्याकरण के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं- विकारी और अविकारी या अव्यय। विकारी शब्दों को चार भागों में बाँटा गया है- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। अविकारी शब्द या अव्यय भी चार प्रकार के होते हैं- क्रिया विशेषण, संबंध बोधक, संयोजक और विस्मयादि बोधक इस प्रकार सब मिलाकर निम्नलिखित 8 प्रकार के शब्द-भेद होते हैं:

संज्ञा

किसी भी नाम, जगह, व्यक्ति विशेष अथवा स्थान आदि बताने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं। उदाहरण -
राम, भारत, हिमालय, गंगा, मेज़, कुर्सी, बिस्तर, चादर, शेर, भालू, साँप, बिच्छू आदि।
संज्ञा के भेद- सज्ञा के कुल ६ भेद बताये गये हैं- १-व्यक्तिवाचक: जैसे राम, भारत, सूर्य आदि। २-जातिवाचक: जैसे बकरी, पहाड़, कंप्यूटर आदि। ३-समूह वाचक: जैसे कक्षा, बारात, भीड़, झुंड आदि। ४-द्रव्य वाचक: जैसे पानी, लोहा, मिट्टी, खाद या उर्वरक आदि। ५-संख्या वाचक: जैसे दर्जन, जोड़ा, पांच, हज़ार आदि। ६-भाववाचक: जैसे

[संपादित करें] सर्वनाम

संज्ञा के बदले में आने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं। उदाहरण -
मैं, तू, तुम, आप, वह, वे आदि।
सर्वनाम भारतकोश- ज्ञान का हिन्दी महासागर यहाँ जाएँ:भ्रमण, खोज
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द को सर्वनाम कहते है। संज्ञा की पुनरुक्ति न करने के लिए सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है। जैसे - मैं, तू, तुम, आप, वह, वे आदि।